Kargil War के 18 साल/18 years of Kargil War

Kargil War के 18 साल: भारत ने मार गिराए थे 2700 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक,

कारगिल हिमालय पर है जो श्रीनगर से 215 किलोमीटर की दूरी पर है। यह हिस्सा जोजिला पास बंद होने की वजह से करीब 7 महीने देश से अलग रहता है। उन दिनों कारगिल के बारे में कोई जानता तक नहीं था। अगर कोई कहता कि वो कारगिल से आया है, तो शायद सामने वाले का अगला सवला होता कि वो कहां है? लेकिन 1999 के बाद ना केवल कारगिल बल्कि यहां के छोटे-छोटे गांव भी लाइम लाइट में आ गए। वजह था कारगिल युद्ध। सरकार को खबर मिली थी कि पाकिस्तान ने कारगिल के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद दुश्मनों को अपनी जमीन से दूर भगाने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू हुआ। इसके बाद कारगिल अखबार, न्यूज चैनल हर मीडिया में छा गया। उस समय हर भारतीय देश की सीमा पर लगे कारगिल की चर्चा कर रहा था। आज करगिल विजय दिवस पर पढ़िए इससे जुड़ी कुछ खास बातें।

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1999 में कारगिल में युद्ध शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले जनरल परवेज मुशर्रफ हेलीकॉप्टर से भारत आए थे। भारतीय सीमा के 11 किलोमीटर अंदर जिकरिया मुस्तकार में उन्होंने एक रात बिताई थी। मुशर्रफ के साथ 80 ब्रिगेड के उस वक्त के कमांडर ब्रिगेडियर मसूद असलम भी थे।

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रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कारगिल की लड़ाई उम्मीद से ज्यादा खतरनाक थी। भारतीय सेना पाकिस्तान की सेना पर भारी पड़ रही थी। यह देखकर मुशर्रफ ने युद्ध में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली थी। एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था।

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पाकिस्तानी सेना 1998 से ही कारगिल युद्ध करने की कोशिशों में थी। इसके लिए उन्होंने अपने 5000 जवानों को कारगिल की चढ़ाई करने के लिए भेजा था।
कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स चीफ को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। बाद में जब एयरफोर्स चीफ को इस ऑपरेशन के बारे में बताया गया तो उन्होंने इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना का साथ देने से मना कर दिया था।

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कारगिल युद्ध में पाकिस्तान ने 2700 से ज्यादा सैनिक गंवाए थे। इस लड़ाई में उन्हें 1965 और 1971 से ज्यादा नुकसान हुआ था। नवाज शरीफ ने भी माना था कि कारगिल युद्ध पाकिस्तानी सेना के लिए आपदा साबित हुआ।

इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का इस्तेमाल किया था। मिग-27 की मदद से उन जगहों पर बम गिराए थे जहां पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा था। साथ ही मिग-29 से पाकिस्तान के कई ठिकानों पर आर-77 मिलाइलें दागी गईं थीं।

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8 मई को शुरू हुए इस युद्ध में 11 मई से इंडियन एयरफोर्स की एक टुकड़ी ने सेना की मदद करनी शुरू कर दी थी। कारगिल की लड़ाई के स्तर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस दौरान एयरफोर्स के 300 विमान उड़ान भरते थे।

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करगिल में उड़ान भरना इतना आसान नहीं था। इसमें हरपल जान का खतरा रहता था। कारगिल समुद्र तल से 16000 से 18000 फीट की ऊंचाई पर है। ऐसे में उड़ान भरने के लिए विमानों को करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ना पड़ता है। इतनी ऊंचाई पर हवा का घनत्व 30% से कम होता है। ऐसे हालातों में विमान में पायलट का दम घुटने का खतरा साथ ही विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा रहता है।

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1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध में 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए थे। 300 से ज्यादा तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों से रोजाना करीब 5,000 बम फायर किए जाते थे। लड़ाई के अहम 17 दिनों में हर रोज हर आर्टिलरी बैटरी से एवरेज एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था। सेकेंड वर्ल्ड वार के बाद यह पहली ऐसी लड़ाई थी, जिसमें किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी ज्यादा बमबारी की थी।

कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है।

नई दिल्ली: कारगिल की लड़ाई अपने आप में कई राज छुपाए हुए है। उस समय क्या हुआ था ये कोई नहीं जानता। हर कोई अलग-अलग अंदाजा लगाता है। हम आज आपको बताने जा रहे हैं कारगिल से जुड़े कुछ अहम राज जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

कारगिल की लड़ाई में हमारे सैनिकों ने पाकिस्तानी फौज का जमकर मुकाबला किया था। पाकिस्तानी घुस्पैठियों ने लगातार गोलियां चलाई और हमारे सैनिकों ने उन्हें सामने से जवाब दिया।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था। इसकी शुरुआत हुई थी 8 मई 1999 से जब पाकिस्तानी फौजियों और कश्मीरी आतंकियों को कारगिल की चोटी पर देखा गया था।

यह लड़ाई 14 जुलाई तक चली थी। माना जाता है कि पाकिस्तान इस ऑपरेशन की 1998 से तैयारी कर रहा था।

What is Kargil Fight: कारगिल युद्ध

कारगिल युद्ध के तीन चरण रहे. पहला, पाकिस्तानी घुसपैठियों ने श्रीनगर को लेह से जोड़ते राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमाक एक पर नियंत्रण स्थापित करने के मकसद से अहम सामरिक स्थानों पर कब्जा कर लिया. दूसरा, भारत ने घुसपैठ का पता लगाया और अपने बलों को तुरंत जवाबी हमले के लिए लामबंद करना शुरू किया तथा तीसरा, भारत और पाकिस्तान के बलों के बीच भीषण संघर्ष हुआ और पड़ोसी देश की शिकस्त हुई.

Reason of Kargil Fight

माना जाता है कि भारत ने इस ‘ऑपरेशन विजय’ का जिम्मा प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब दो लाख सैनिकों को सौंपा था. जंग के मुख्य क्षेत्र कारगिल-द्रास सेक्टर में करीब तीस हजार सैनिक मौजूद थे. इस युद्ध के बाद पाकिस्तान के 357 सैनिक मारे गए, लेकिन बताया जाता है कि भारतीय सेना की कार्रवाई में उसके चार हजार सैनिकों की जान गई. भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए और 1363 अन्य घायल हुए. विश्व के इतिहास में कारगिल युद्ध दुनिया के सबसे ऊंचे क्षेत्रों में लड़ी गई जंग की घटनाओं में शामिल है.

कारगिल युद्ध की मुख्य वजह

कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के जरिये घुसपैठ करने की साजिश के पीछे तत्कालीन पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ को जिम्मेदार माना जाता है.

मई 1999 में एक लोकल ग्वाले से मिली सूचना के बाद बटालिक सेक्टर में ले. सौरभ कालिया के पेट्रोल पर हमले ने उस इलाके में घुसपैठियों की मौजूदगी का पता दिया. शुरू में भारतीय सेना ने इन घुसपैठियों को जिहादी समझा और उन्हें खदेड़ने के लिए कम संख्या में अपने सैनिक भेजे, लेकिन प्रतिद्वंद्वियों की ओर से हुए जवाबी हमले और एक के बाद एक कई इलाकों में घुसपैठियों के मौजूद होने की खबर के बाद भारतीय सेना को समझने में देर नहीं लगी कि असल में यह एक योजनाबद्ध ढंग से और बड़े स्तर पर की गई घुसपैठ थी, जिसमें केवल जिहादी नहीं, पाकिस्तानी सेना भी शामिल थी. यह समझ में आते ही भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया, जिसमें 30,000 भारतीय सैनिक शामिल थे.

थल सेना के सपोर्ट में भारतीय वायु सेना ने 26 मई को ‘ऑपरेशन सफेद सागर शुरू किया, जबकि जल सेना ने कराची तक पहुंचने वाले समुद्री मार्ग से सप्लाई रोकने के लिए अपने पूर्वी इलाकों के जहाजी बेड़े को अरब सागर में ला खड़ा किया.

कारगिल युद्ध का अंजाम

दो महीने से ज्यादा चले इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को मार भगाया था और आखिरकार 26 जुलाई को आखिरी चोटी पर भी जीत पा ली गई. यही दिन अब कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है.

Kargil War के 18 साल/18 years of Kargil War

Rajesh Sharma

Blogger, Researcher, Author

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