संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार की जीवनी/Keshav Baliram Hedgewar Biography in Hindi

संघ के संस्थापक  डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार

Keshav Baliram Hedgewar Biography in Hindi

जन्म 4 अप्रैल 1889 मृत्यु जून 21, 1940 

   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार (Keshav Baliram Hedgewar) का जन्म 8 अप्रैल 1889 को नागपुर के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था |वह बचपन से ही क्रांतिकारी प्रवृति के थे और उन्हें अंग्रेज शासको से घृणा थी | अभी स्कूल में ही पढ़ते थे कि अंग्रेज इंस्पेक्टर के स्कूल में निरिक्षण के लिए आने पर केशव राव (Keshav Baliram Hedgewar) ने अपने कुछ सहपाठियों के साथ उनका “वन्दे मातरम” जयघोष से स्वागत किया जिस पर वह बिफर गया और उसके आदेश पर केशव राव को स्कूल से निकाल दिया गया | तब उन्होंने मैट्रिक तक अपनी पढाई पूना के नेशनल स्कूल में पुरी की 

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार का पूरा जीवन अखंड भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने ही देश में पहला हिंदुओं की रक्षा करने के लिए एक संगठन बनाया जो बाद में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ बन गया। आरएसएस का आधार इसकी शाखाएं मानी जाती हैं। पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की जिस संगठन की शुरुआत महाराष्ट्र के नागपुर से हुई थी उसकी पहली शाखा मध्यप्रदेश के खंडवा शहर से हुई थी। इसकी शुरुआत की थी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पहले सर संघ चालक और संघ के आधार स्तंभ डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार ने।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्‍थापना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्‍थापना सन् 27 सितंबर 1925 को विजय दशमी के दिन मोहिते के बाड़े नामक स्‍थान पर डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ के 5 स्‍वयंसेवकों के साथ शुरू हुई विश्व की पहली शाखा आज 50 हजार से अधिक शाखाओ में बदल गई और ये 5 स्‍वयंसेवक आज करोड़ों स्‍वयंसेवकों के रूप में हमारे समाने है। संघ की विचार धारा में राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, हिंदू राष्ट्र, राम जन्मभूमि, अखंड भारत, समान नागरिक संहिता जैसे विजय है जो देश की समरसता की ओर ले जाता है। बीबीसी के अनुसार संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान है। सबसे पहले 50 वर्ष बाद 1975 में जब आपातकाल की घोषणा हुई तो तत्कालीन जनसंघ पर भी संघ के साथ प्रतिबंध लगा दिया गया। आपातकाल हटने के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ और केन्द्र में मोरारजी देसाई के प्रधानमन्त्रित्व में मिलीजुली सरकार बनी। 1975 के बाद से धीरे-धीरे इस संगठन का राजनीतिक महत्व बढ़ता गया और इसकी परिणति भाजपा जैसे राजनीतिक दल के रूप में हुई जिसे आमतौर पर संघ की राजनीतिक शाखा के रूप में देखा जाता है। संघ की स्थापना के 75 वर्ष बाद सन् 2000 में प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन की सरकार भारत की केन्द्रीय सत्ता पर आसीन हुई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालकों की सूची

  1. डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार (1925 – 1940)
  2. माधव सदाशिवराव गोलवलकर (1940 – 1973)
  3. मधुकर दत्तात्रय देवरस (1973 – 1993)
  4. प्रो. राजेंद्र सिंह (1993 – 2000)
  5. कृपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन (के एस सुदर्शन) ( 2000 – 2009 )
  6. डॉ. मोहनराव मधुकरराव भागवत (2009 – अब तक)

खंडवा में लगी पहली शाखा

 डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार द्वारा खंडवा में आरएसएस की पहली शाखा लगाने का जिक्र वर्तमान सर संघ चालक मोहन भागवत ने ही एक बार अपने खंडवा प्रवास के दौरान किया था। उन्होंने कहा था कि खंडवा से संघ का काफी पुराना रिश्ता है। यहीं से शुरू हुई संघ की पहली शाखा आज पूरे विश्व में फैल चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि डॉ. हेडगेवार और माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने भी खंडवा आकर स्वयंसेवकों को जोड़ा था।

 हेडगेवार जब वे 9 साल के थे, तो उन्होंने रानी विक्टोरिया के राज्यारोहण की पचासवीं जयंती पर बांटी गई मिठाई यह कहकर कूड़े में फेंक दी थी कि विदेशी राज्य की खुशियां हम क्यों मनाएं। इसी प्रकार 15 वर्ष की अवस्था में स्कूल निरीक्षक के आने पर उन्होंने हर कक्षा द्वारा ‘वन्दे मातरम्’ का नारा लगवाया था। इससे नाराज होकर प्रधानाचार्य ने उनको विद्यालय से निकाल दिया था और फिर वे दूसरे विद्यालय में पढ़े थे। डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक  डॉक्टरी की पढ़ाई करने कलकत्ता गए। परिवार जनों की इच्छा थी की वह नौकरी करें पर उन्होंने ऐसा न कर देश सेवा का रास्ता चुना।

मृत्यु

 धर्मवीर डाक्टर मुंजे और वीर सावरकर के सम्बन्ध में डॉक्टर हेडगेवार ने भारत के घोरता के कारणों को बडी बारीकी से पहचाना और इसके स्थायी समाधान के लिए संघ कार्य शुरू किया। इन्हें सदैव ही बताने का प्रयास किया है कि नये चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें नये तरीके से काम करना पड़ता है और स्वयं को बदलना होगा, अब ये पुराने तरीके से काम नहीं आएंगे। [2] डॉ.साहब 1925 से 1940 तक, अर्थ मृत्यु के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सरन्घचालक रहने 21 जून, 1940 में उनकी मौत हो गई। इनकी समाधि रेशम बाग नागपुर में स्थित है, जहां इनके अंत्येष्टि सस्कार हुआ था।

 

 

 संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार की जीवनी  –  Keshav Baliram Hedgewar Biography in Hindi

Rajesh Sharma

Blogger, Researcher, Author

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