नेताजी के चालक कर्नल निजामुद्दीन-Colonel Nizamuddin, The Driver of Netaji

निजामुद्दीन ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के वाहन चालक और सुरक्षा प्रहरी की भूमिका निभाई थी, लेकिन उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की प्रक्रिया पिछले साल तब आगे बढ़ी जब आजमगढ़ प्रशासन उनकी ओर से पेश किए गए इस आशय के प्रमाणों से संतुष्ट हो गया कि वह नेताजी के साथ रहे थे। निजामुद्दीन के बेटे ने बताया कि पिताजी ने नरेंद्र मोदी को अच्छा नेता बताते हुए उनसे मिलने की इच्छा जताई थी।

निजामुद्दीन का जन्म आजमगढ़ के मुबारकपुर इलाके ढकवा गांव में 1901 को हुआ था। निजामुद्दीन के मुताबिक उनके पिता इमाम अली सिंगापुर में कैंटीन चलाते थे। 24-25 साल की आयु में वह भी गांव से भागकर पिता के पास सिंगापुर चले गए। यह वह दौर था जब सुभाष चंद्र बोस सिंगापुर में आजाद हिंद फौज के लिए युवाओं की भर्ती करने में लगे हुए थे।

उन्होंने उनका चयन अपने निजी सुरक्षा गार्ड और वाहन चालक के रूप में किया और उन्हें कर्नल की उपाधि भी दी। वह इसी भूमिका में नेताजी के साथ दस साल रहे। उन्होंने नेताजी के साथ जापान, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया आदि देशों की यात्रा की। उनके अनुसार चूंकि अंग्रेज नेताजी की ताक में रहते थे इसलिए वह ज्यादातर पनडुब्बी के जरिये समुद्री यात्रा करते थे।

नेताजी के रहस्यमय तरीके से लापता होने के बाद वह कोलकाता में उनके घर तक गए, लेकिन कोई सूचना न मिलने पर वह बर्मा लौट गए। जून 1969 में वह अपने गांव लौट आए थे। पहली बार 2001 में उन्होंने यह राज खोला कि वह नेताजी के साथ रहे। स्थानीय प्रशासन और सरकार ने उनके दावे को सत्यापित करने में 12 साल लगा दिए।

Rajesh Sharma

Blogger, Researcher, Author

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