जनरल बिक्रम सिंह कौन हैं? – Who is General Bikram Singh?

जनरल बिक्रम सिंह कौन हैं?

Who is General Bikram Singh?

जनरल बिक्रम सिंह, परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक, एडीसी[2]भारतीय थलसेना के 25वें अध्यक्ष रह चुके हैं। भारतीय सेना की पूर्वी कमान के अध्यक्ष रहे जनरल बिक्रम सिंह, 31 मई 2012 को जनरल वी के सिंह के सेवानिवृत्त होने के पश्चात् भारतीय थलसेना के अध्यक्ष बने।[3][4] जनरल जे जे सिंह के बाद इस पद पर आसीन होने वाले वे द्वितीय सिख हैं।[5] वे भारतीय सेना के सेनाध्यक्षों की समिति के अध्यक्ष भी रहे।[6] 31 जुलाई 2014 को वे सेवानिवृत्त हुए

सेना में करियर

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 40वें बैच के ग्रैजुएट[8] श्री सिंह ने 31 मार्च 1972 को सिख लाईट इन्फेण्ट्री में सेना में शामिल हुए। इन्फेण्ट्री स्कूल में उन्हें “बेस्ट यंग ऑफिसर” का खिताब मिला। सर्वोत्तम कमाँडो के लिए उन्हें “कमाण्डो खुकरी” तथा “बेस्ट इन टैक्टिक्स” ट्रॉफी भी मिली। बाद में वे इन्फेण्ट्री स्कूल के कमाण्डो विंग में इंस्ट्रक्टर भी रहे।[1] 2004 में उन्होंने यूनाईटेड स्टेट्स आर्मी वार कॉलेज से ग्रैजुएट किया और सेनाध्यक्ष रहते हुए अंतर्राष्ट्रीय शाँति व स्थिरता में उनके significant and enduring योगदान के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठान “अंतर्राष्ट्रीय हॉल ऑफ फेम” से सम्मानित किया गया।[9]

हायर कमाँड का कोर्स पूरा करने के पश्चात् उनका प्रथम कार्यकाल Military Operations (MO) Directorate में डायरेक्टर के रूप में था। इसी समय में कारगिल युद्ध हुआ जिसके दौरान वे भारतीय सेना के प्रमुख प्रवक्ता थे। सेना मुख्यालय में उन्होंने चार प्रमुख जिम्मेदारियाँ निभाई- डिप्टी डायरेक्टर जनरल के रूप में MO Directorate में अतिरिक्त कार्यकाल, Perspective Planning Directorate में दो कार्यकाल, Perspective Planning (Strategy) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और बाद में अतिरिक्त डायरेक्टर जनरल के रूप में। डायरेक्टर जनरल स्टाफ ड्यूटीज़ (DGSD) के पद पर लेफ्टिनेण्ट जनरल के रूप में वे पुनः सेना मुख्यालय में आए।[1]

वे जीओसी-इन-सी पूर्वी कमान, जीओसी 15 कॉर्प्स, जीओसी राष्ट्रीय राईफल्स तथा काँगो में जीओसी पूर्वी डिवीज़न के पद भी संभाल चुके हैं।[1] जम्मू कश्मीर में ब्रिगेडियर की पोस्टिंग के दौरान वे घायल भी हुए।

सम्मान

रम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) ,भारत का एक सैन्य पुरस्कार है। इसका गठन 1960 में किया गया था [2] और तब से आज तक, यह शांति के लिए और सेवा क्षेत्र में सबसे असाधारण कार्य (मरणोपरांत भी ) सम्मानित किया जाता है। भारतीय सशस्त्र बलों सहित सभी रैंकों के लिए ,प्रादेशिक सेना, सहायक और रिजर्व बलों, नर्सिंग अधिकारियों और अन्य सदस्यों के नर्सिंग सेवाओं और अन्य विधिवत् गठित सशस्त्र बल इस पदक के पात्र है।

उत्तम युद्ध सेवा पदक युद्धकालीन उल्लेखनीय सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदत्त सैन्य सम्मान में से एक है। इसे परिचालन संबंधी उच्च स्तर की विशिष्ट सेवाओं के लिए दिया जाता है,”परिचालनात्मक संदर्भ” में युद्ध, संघर्ष या शत्रुता का समय शामिल हैं। यह युद्धकालीन सम्मान ,अति विशिष्ट सेवा पदक के समकक्ष है, जो एक शांतिकालीन विशिष्ट सेवा सम्मान है। उत्तम युद्ध सेवा पदक मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है

अति विशिष्ट सेवा पदक ( एवीएसएम ) सशस्त्र बलों के सभी रैंकों के लिए भारत सरकार का एक सैन्य पुरस्कार है यह पुरस्कार मरणोपरांत भी प्रदान किया जाता है। एक से अधिक बार यह पुरस्कार प्राप्त करने पर,पदक के साथ एक पट्टिका जोड़ दी जाती है।

इतिहास

अति-विशिष्ट सेवा पदक मूलतः “विशिष्ट सेवा पदक, वर्ग II” के रूप में स्थापित किया गया था। इसे 27 जनवरी, 1967 को यह नाम दिया गया और बैज को दोबारा बदल दिया गया। 1 9 80 से यह पदक मात्र गैर-परिचालन की सेवा के लिए दिया जाता है क्योंकि परिचालन में विशिष्ट सेवाओं को पहचानने के लिए उत्तम युद्ध सेवा मेडल का प्रावधान किया गया था।

 

 

Rajesh Sharma

Blogger, Researcher, Author

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